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Aaj ka Panchang आज का पञ्चांग 15 फरवरी 2024 दिन गुरुवार

 

Dharamyugslma

*🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞*


*⛅दिनांक - 15 फरवरी 2024*

*⛅दिन - गुरुवार*

*⛅विक्रम संवत् - 2080*

*⛅अयन - उत्तरायण*

*⛅ऋतु - शिशिर*

*⛅मास - माघ*

*⛅पक्ष - शुक्ल*

*⛅तिथि - षष्ठी सुबह 10:12 तक तत्पश्चात सप्तमी*

*⛅नक्षत्र - अश्विनी सुबह 09:26 तक तत्पश्चात भरणी*

*⛅योग - शुक्ल शाम 05:23 तक तत्पश्चात ब्रह्म*

*⛅राहु काल - दोपहर 02:19 से 03:45 तक*

*⛅सूर्योदय - 07:12*

*⛅सूर्यास्त - 06:35*

*⛅दिशा शूल - दक्षिण*

*⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 05:31 से 06:22 तक*

*⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:28 से 01:19 तक*

*⛅व्रत पर्व विवरण - शीतल षष्ठी (प. बंगाल)*

*⛅विशेष - षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है ।  सप्तमी को ताड़ का फल खाया जाय तो वह रोग बढ़ानेवाला तथा शरीर का नाशक होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* 

        

*🔸भीष्म अष्टमी - 16 फरवरी 24* 


*🌹 भीष्म अष्टमी (भीष्म श्राद्ध दिवस है) । इस दिन भीष्मजी के नाम से सूर्य को अर्घ्य दें तो निःसंतान को संतान मिल सकती है और आरोग्य आदि प्राप्त होता है ।*


*वसूनामवताराय शंतनोरात्मजाय च ।*

*अघ्र्यं ददामि भीष्माय आबालब्रह्मचारिणे ।*

 

*🌹 ईस मंत्र से भीष्माष्टमी के दिन भीष्मजी को तिल, गंध, पुष्प, गंगाजल व कुश मिश्रित अर्ध्य देने से अभीष्ट सिद्ध होता है । वर्षभर के पाप नष्ट हो जाते हैं। सुंदर और गुणवान संतति प्राप्त होती है ।*


*🌹 अचला सप्तमी - 16 फरवरी 24 🌹*


*🔸अचला सप्तमी की महिमा🔸*


*🔸 माघ शुक्ल सप्तमी को अचला सप्तमी, रथ सप्तमी, आरोग्य सप्तमी, भानु सप्तमी, अर्क सप्तमी आदि अनेक नामों से सम्बोधित किया गया है और इसे सूर्य की उपासना के लिए बहुत ही सुन्दर दिन कहा गया है । पुत्र प्राप्ति, पुत्र रक्षा तथा पुत्र अभ्युदय के लिए इस दिन संतान सप्तमी का व्रत भी किया जाता है ।*


*🔸भगवान सूर्य जिस तिथि को पहले-पहल रथ पर आरूढ़ हुए, वह ब्राह्मणों द्वारा माघ मास की सप्तमी बताई गयी है, जिसे रथसप्तमी कहते हैं । उस तिथि को दिया हुआ दान और किया हुआ यज्ञ सब अक्षय माना जाता है । वह सब प्रकार की दरिद्रता को दूर करने वाला और भगवान सूर्य की प्रसन्नता का प्राप्त कराने वाला है । - स्कन्द पुराण*


*🔸भविष्य पुराण के अनुसार सप्तमी तिथि को भगवान् सूर्य का आविर्भाव हुआ था । ये अंड के साथ उत्पन्न हुए और अंड में रहते हुए ही उन्होंने वृद्धि प्राप्त कि । बहुत दिनोंतक अंड में रहने के कारण ये ‘मार्तण्ड’ के नामसे प्रसिद्ध हुए ।*


*🔹भगवान श्रकृष्ण कहते है– राजन ! शुक्ल पक्षकी सप्तमी तिथि को यदि आदित्यवार (रविवार) हो तो उसे विजय सप्तमी कहते है । वह सभी पापोका विनाश करने वाली है । उस दिन किया हुआ स्नान ,दान्, जप, होम तथा उपवास आदि कर्म अनन्त फलदायक होता है । -भविष्य पुराण*


*🔹नारद पुराण में माघ शुक्ल सप्तमी को “अचला व्रत” बताया गया है । यह “त्रिलोचन जयन्ती” है ।  इसी को रथसप्तमी कहते हैं । यही “भास्कर सप्तमी” भी कहलाती है, जो करोड़ों सूर्य-ग्रहणों के समान है । इसमें अरूणोदय के समय स्नान किया जाता है । इसी सप्तमी को ‘’पुत्रदायक ” व्रत भी बताया गया है । स्वयं भगवान सूर्य ने कहा है - ‘जो माघ शुक्ल सप्तमी को विधिपूर्वक मेरी पूजा करेगा, उसपर अधिक संतुष्ट होकर मैं अपने अंश से उन्सका पुत्र होऊंगा’ । इसलिये उस दिन इन्द्रियसंयमपूर्वक दिन-रात उपवास करे और दूसरे दिन होम करके ब्राह्मणों को दही, भात, दूध और खीर आदि भोजन करावें ।*


*🔸अग्नि पुराण में अग्निदेव कहते हैं – माघ मासके शुक्लपक्ष की सप्तमी तिथिको (अष्टदल अथवा द्वादशदल) कमल का निर्माण करके उसमें भगवान् सूर्यका पूजन करना चाहिये । इससे मनुष्य शोकरहित हो जाता है ।*


*🔹चंद्रिका में लिखा है 'माघ शुक्ल सप्तमी सूर्यग्रहण के तुल्य होती है सूर्योदय के समय इसमें स्नान का महाफल होता है ।'*


*🔹चंद्रिका में भी विष्णु ने लिखा है 'माघ शुक्ल सप्तमी यदि अरुणोदय के समय प्रयाग में प्राप्त हो जाए तो कोटि सूर्य ग्रहणों के तुल्य होती है ।'*


*🔹मदनरत्न में भविष्योत्तर पुराण का कथन है की “माघ मास की शुक्लपक्ष सप्तमी कोटि सूर्यों के बराबर है उसमें सूर्य स्नान, दान, अर्घ्य से आयु आरोग्य सम्पदा प्राप्त होती हैं ।''*


🙏🚩 जय श्री राम 🙏🌹🚩

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