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Aaj ka Panchang आज का पञ्चांग 18 फरवरी 2024 दिन रविवार ll

Dharamyugslma

 *🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞*


*⛅दिनांक - 18 फरवरी 2024*

*⛅दिन - रविवार*

*⛅विक्रम संवत् - 2080*

*⛅अयन - उत्तरायण*

*⛅ऋतु - शिशिर*

*⛅मास - माघ*

*⛅पक्ष - शुक्ल*

*⛅तिथि - नवमी सुबह 08:15 तक तत्पश्चात दशमी*

*⛅नक्षत्र - रोहिणी सुबह 09:23 तक तत्पश्चात मृगशिरा*

*⛅योग - वैधृति दोपहर 12:39 तक तत्पश्चात विष्कम्भ*

*⛅राहु काल - शाम 05:11 से 06:37 तक*

*⛅सूर्योदय - 07:10*

*⛅सूर्यास्त - 06:37*

*⛅दिशा शूल - पश्चिम*

*⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 05:30 से 06:29 तक*

*⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:28 से 01:18 तक*

*⛅व्रत पर्व विवरण - गुप्त नवरात्रि-नवमी*

*⛅विशेष - नवमी को लौकी एवं दशमी को कलम्बी शाक खाना त्याज्य है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* 

        

*🔸जया एकादशी - 20 फरवरी 24🔸*


*🔹एकादशी 19 फरवरी सुबह 08:49 से 20 फरवरी सुबह 09:55 तक ।*


*🔹व्रत उपवास 20 फरवरी मंगलवार को रखा जायेगा । 19, 20 फरवरी दो दिन चावल खाना निषिद्ध है ।*


*🔸एकादशी व्रत के लाभ🔸*


*👉 एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है ।*


*👉 जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।*


*👉 जो पुण्य गौ-दान, सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।*


*👉 एकादशी करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं । इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है ।*


*👉 धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है ।*


*👉 कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है ।*


*🌹19 फरवरी 2024 से वसंत ऋतु प्रारम्भ*


*🌹आहार : इस ऋतु में देर से पचनेवाले, शीतल पदार्थ, दिन में सोना, स्निग्ध अर्थात् घी-तेल में बने तथा अम्ल व मधुर रसप्रधान पदार्थों का सेवन न करें क्योंकि ये सभी कफवर्धक हैं ।*


*(अष्टांगहृदय : 3.26)*


*🌹वसंत में मिठाई, सूखा मेवा, खट्टे-मीठे फल, दही, आइसक्रीम तथा गरिष्ठ भोजन का सेवन वर्जित है । इन दिनों में शीघ्र पचनेवाले, अल्प तेल व घी में बने, तीखे, कड़वे, कसैले, उष्ण पदार्थों जैसे - लाई, मुरमुरे, जौ, भुने हुए चने, पुराना गेहूँ, चना, मूँग; अदरक, सोंठ, अजवायन, हल्दी, पीपरामूल, काली मिर्च, हींग; सूरन, सहजन की फली, करेला, मेथी, ताजी मूली, तिल का तेल, शहद, गोमूत्र आदि कफनाशक पदार्थों का सेवन करें । भरपेट भोजन न करें । नमक का कम उपयोग तथा 15 दिनों में एक कड़क उपवास स्वास्थ्य के लिए हितकारी है ।*

 

*🌹विहार : सूर्योदय से पूर्व उठना, व्यायाम, दौड़, तेज चलना, आसन व प्राणायाम (विशेषकर सूर्यभेदी) लाभदायी हैं । तिल के तेल से मालिश कर सप्तधान्य उबटन से स्नान करना स्वास्थ्य की कुंजी है ।*


*🔹 रविवार विशेष🔹*


*🔹 रविवार के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*


*🔹 रविवार के दिन मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75.90)*


*🔹 रविवार के दिन काँसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75)*


*🔹 रविवार सूर्यदेव का दिन है, इस दिन क्षौर (बाल काटना व दाढ़ी बनवाना) कराने से धन, बुद्धि और धर्म की क्षति होती है ।*


*🔹 रविवार को आँवले का सेवन नहीं करना चाहिए ।*


*🔹 स्कंद पुराण के अनुसार रविवार के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए । इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं ।*


*🔹 रविवार के दिन पीपल के पेड़ को स्पर्श करना निषेध है ।*


*🔹 रविवार के दिन तुलसी पत्ता तोड़ना वर्जित है ।*


🙏🚩 जय श्री राम 🙏🚩

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