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Aaj ka Panchang पञ्चांग 21 फरवरी 2024 दिन बुधवार

 

Dharamyugslma

*🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞*


*⛅दिनांक - 21 फरवरी 2024*

*⛅दिन - बुधवार*

*⛅विक्रम संवत् - 2080*

*⛅अयन - उत्तरायण*

*⛅ऋतु - वसंत*

*⛅मास - माघ*

*⛅पक्ष - शुक्ल*

*⛅तिथि - द्वादशी सुबह 11:27 तक तत्पश्चात त्रयोदशी*

*⛅नक्षत्र - पुनर्वसु दोपहर 02:18 तक तत्पश्चात पुष्य*

*⛅योग - आयुष्मान दोपहर 11:51 तक तत्पश्चात सौभाग्य*

*⛅राहु काल - दोपहर 12:53 से 02:23 तक*

*⛅सूर्योदय - 07:08*

*⛅सूर्यास्त - 06:39*

*⛅दिशा शूल - उत्तर*

*⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 05:28 से 06:18 तक*

*⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:28 से 01:18 तक*

*⛅व्रत पर्व विवरण - वराह द्वादशी, प्रदोष व्रत*

*⛅विशेष -द्वादशी को पूतिका (पोई) एवं त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*


*🔸वसंत ऋतु में (19 फरवरी से 19 अप्रैल तक) क्या न करें ?*


*🔹1] खट्टे, मधुर, खारे, स्निग्ध (घी – तेल से बने), देर से पचनेवाले व शीतल पदार्थो का सेवन हितकर नहीं है, अत: इनका सेवन अधिक न करें । (अष्टांगह्रदय, चरक संहिता )*


*🔹2] नया गेहूँ व चावल, खट्टे फल, आलू, उड़द की दाल, कमल – ककड़ी, अरवी, पनीर, पिस्ता, काजू, शरीफा, नारंगी, दही, गन्ना, नया गुड़, भैस का दूध, सिंघाड़े, कटहल आदि का सेवन अहितकर है ।*


*🔹3] दिन में सोना, ओस में सोना, रात्रि–जागरण, परिश्रम न करना हानिकारक है । अति परिश्रम या अति व्यायाम भी न करें ।*


*🔹4] आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स व फ्रिज के ठंडे पानी का सेवन न करें ।*


 *🔹5] एक साथ लम्बे समय तक बैठे या सोयें नहीं तथा अधिक देर तक व ठंडे पानी से स्नान न करें ।*


*🔹प्रदोष व्रत - 21 फरवरी🔹*  


*🌹 सूतजी कहते हैं - त्रयोदशी तिथि में सायंकाल प्रदोष कहा गया है । प्रदोषके समय महादेवजी कैलासपर्वत के रजत भवन में नृत्य करते हैं और देवता उनके गुणों का स्तवन करते हैं । अतः धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की इच्छा रखनेवाले पुरुषों को प्रदोष में नियम पूर्वक भगवान् शिव की पूजा, होम, कथा और गुणगान करने चाहिये ।*


*🔹दरिद्रता के तिमिर से अन्धे और भवसागर में डूबे हुए संसार भय से भीरु मनुष्यों के लिये यह प्रदोषव्रत पार लगानेवाली नौका है ।*


*🔸भगवान् शिव की पूजा करने से मनुष्य दरिद्रता, मुर्त्यु-दुःख और पर्वत के समान भारी ऋण-भार को शीघ्र ही दूर कर के सम्पत्तियों से पूजित होता है।*

*(स्कन्द पुराण : ब्रम्होत्तर खंड)*


*🔹किसी की मृत्यु के वक्त🔹* 


*🔸कहीं भी मृत्यु हो गई तो उसका तुम भला करना । तुलसी की सुखी लकड़ीयाँ अपने घर में रख लो । कही भी अपने अड़ोस-पड़ोस में किसी की मृत्यु हुई तो उसके होठों पर, आँखों पर, शरीर पर, छाती पर तुलसी की सुखी लकड़ीयाँ थोड़ी रख लो और तुलसी की लकड़ी से उसका अग्निदान शुरू करो ।*


*🔸उसका कितना भी पाप होगा, दुर्गति से रक्षा होगी, नरकों से रक्षा होगी अथवा तुलसी की लकड़ीयाँ न हो तो तुलसी की माला शव के गले में डाल दो तो भी उसको राहत मिलेगी कर्मबंधन से ।*


*🔹तुलसी के पत्ते उसके मुहँ में डाल दो । तुलसी का पानी जरा छिटक दो । हरी ॐ ॐ ॐ.. का कीर्तन कराओ । फिर हास्य न कराओ । हरी ॐ ॐ... शांति ॐ... तुम अमर आत्मा हो । तुम चैतन्य हो । तुम शरीर नहीं हो । शरीर बदलता है । आत्मा ज्यों का त्यों । ॐ ॐ... कुटुम्बियों को मंगलमय जीवन मृत्यु पुस्तक पढ़ायें और कुटुंबी उसके लिए बोले क्योंकि मृतक व्यक्ति सवा दो घंटे के बाद मूर्छा से जगता है, जैसे आप मुर्दे को देखते हो, ऐसे ही वो अपने मुर्दे शरीर को देखता है । तो सूचना दो । तुम शरीर नहीं हो... तुम अमर आत्मा हो । मरनेवाले तुम नहीं हो ।*


*शरीर का नाम है आप अनाम है । शरीर साकार है, आप निराकार है । शरीर जड़ था आप चेतन हो ॐ ॐ... आपने मृतक व्यक्ति की बड़ी भारी सेवा कर दी । उसके विचारों में आत्मज्ञान भरने का महापुण्य किया है । जो आत्मज्ञान देता है, वो तो  ईश्वर रूप हो जाता है । आपका आत्मा तो ईश्वर रूप है ही है । कोई भी मर जाए, चाहे दुश्मन मर जाए, वैर मत रखो । उसकी सदगति हो, उसका भला हो ।*


🙏🚩 जय श्री राम 🌹🙏

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