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आज का पञ्चांग पंचक आज का पंचांग तिथि, वार, नक्षत्र 26 फरवरी 2024

Dharamyugslma

 *🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞*


*⛅दिनांक - 26 फरवरी 2024*

*⛅दिन - सोमवार*

*⛅विक्रम संवत् - 2080*

*⛅अयन - उत्तरायण*

*⛅ऋतु - वसंत*

*⛅मास - फाल्गुन*

*⛅पक्ष - कृष्ण*

*⛅तिथि - द्वितीया रात्रि 11:15 तक तत्पश्चात तृतीया*

*⛅नक्षत्र - उत्तराफाल्गुनी 27 फरवरी प्रातः 04:31 तक तत्पश्चात हस्त*

*⛅योग - धृति दोपहर 03:27 तक तत्पश्चात शूल*

*⛅राहु काल - सुबह 08:31 से 09:59 तक*

*⛅सूर्योदय - 07:04*

*⛅सूर्यास्त - 06:41*

*⛅दिशा शूल - पूर्व*

*⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 05:25 से 06:15 तक*

*⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:28 से 01:17 तक*

*⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:30 से 01:16 तक*

*⛅व्रत पर्व विवरण -*

*⛅विशेष - द्वितीया को बृहती (छोटा बैंगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*


*🔸शारीरिक-मानसिक आरोग्य हेतु संजीवनी बूटी : पैदल भ्रमण🔸*


*🔸कैसा भ्रमण है लाभदायी ?*


*🔹पैदल भ्रमण करते समय शरीर सीधा व वस्त्र कम रहें । दोनों हाथ हिलाते हुए और नाक से गहरे गहरे श्वास लेते हुए भ्रमण करना चाहिए । गहरे श्वास लेने से प्राणायाम का भी लाभ मिलता है ।*


*🔹शारीरिक के साथ यह मानसिक स्वास्थ्य में भी लाभदायी है । इससे काम, क्रोध, ईर्ष्या आदि मनोदोषों का शमन होता है । एकाग्रता विकसित होती है ।*

 

*🔹ओस की बूँदों से युक्त हरी घास पर टहलना अधिक हितकारी हैं । यह नेत्रों के लिए विशेष लाभकारी है । वर्षा के दिनों में भीगी घास पर टहल सकते हैं ।*


*🔹भ्रमण सामान्यरूप से शारिरिक क्षमता के अनुसार मध्यम गति से ही करें । सुश्रुत संहिता (चिकित्सा स्थान : २४.८०) में आता है : यत्तु चङ्क्रमणं नातिदेहपीडाकरं भवेत् । तदायुर्बलमेधाग्निप्रदमिन्द्रियबोधनम् ॥*


*🔹'जो भ्रमण शरीर को अत्यधिक कष्ट नहीं देता वह आयु, बल एवं मेधा प्रदान करनेवाला होता है, जठराग्नि को बढ़ाता है और इन्द्रियों की शक्ति को जागृत करता है ।'*


*🔸भ्रमण है अनेक रोगों में लाभकारी🔸*


*🔹स्नायु दौर्बल्य, मानसिक रोग, अनिद्रा, स्वप्नदोष, सर्दी, खाँसी, सिरदर्द, कब्ज, दुबलापन और कमजोरी आदि में टहलना रामबाण औषधि है ।*


*🔹इन रोगों में प्रातः भ्रमण का लाभ बताते हुए डॉ. कार्नेलिया ई. फिलिप्स, डी.ओ. कहते हैं : "मैं यह बात अपने ३० वर्षों के अनुभव से कह रहा हूँ, जिस अवधि में मैंने इन रोगों से पीड़ित न जाने कितने निराश, हताश और निरुपाय रोगियों को पूर्ण स्वास्थ्य लाभ कराया है । इसलिए मुझे दृढ विश्वास हो गया है कि खोये हुए स्वास्थ्य को फिर से पाने का यह कुदरती तरीका इतना प्रभावशाली है कि इसके बारे में चाहे जितना भी कहा जाय उसमें अतिशयोक्ति नहीं होगी ।"*


*🔹भ्रमण से मोटापा कम होता है, भूख खुलकर लगती है, पुराने कब्ज व अपच में यह उत्तम औषधि भ्रमण सामान्यरूप से अपनी शारीरिक क्षमता का काम करता है। यह युवकों में काम-वासना को नियंत्रित करता है ।*


*🔹आधुनिक अनुसंधानों के परिणाम🔹*


*🔸आधुनिक अनुसंधानों में पाया गया है कि*


*🔹पैदल चलने से संधिवात (arthritis) संबंधी दर्द कम हो जाता है । हर हफ्ते ५-६ मील (८-१० कि.मी.) तक पैदल चलने से संधिवात की बीमारी होने से भी बचा जा सकता है ।*


*🔹 जैसे-जैसे पैदल चलना बढ़ता जाता है । डॉ. जे. बी. स्कॉट ने लिखा है 'मध्यम वैसे-वैसे कोरोनरी हृदयरोगों (हृदय की गति से भ्रमण करना अधिकांश व्यक्तियों के लिए रक्तवाहिनियों में अवरोध) के होने का जोखिम कम होता जाता है । आम जनता में कोरोनरी हृदयरोगों की रोकथाम के लिए भ्रमण को एक आदर्श व्यायाम के रूप में बढ़ावा देना चाहिए ।*


*🔹 पैदल चलने से व्यक्ति की रचनात्मकता में औसतन ६० प्रतिशत तक की वृद्धि होती है ।*


*🔹भ्रमण उच्च रक्तचाप (hypertension) व टाइप-2 डायबिटीज होने के जोखिम को कम करता है ।*


*🔹ध्यान रखें🔹*


*🔸घास न हो तो नंगे पैर भ्रमण न करें । नंगे पैर भ्रमण रोगकारक, नेत्रज्योति व आयु नाशक है । भ्रमण प्रदूषणरहित स्थान पर करें । यदि यह सुविधा न हो सके तो अपने घर की छत के ऊपर गमलों में तुलसी, मोगरा, गुलाब आदि लगाकर सुबह- शाम उनके आसपास पैदल चल सकते हैं ।*


🙏🚩 जय श्री राम 🙏🌹

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